Friday 11 July 2014

ऐ लड़कियों

तुम पर तुम्हारी कोई मर्जी नहीं चलेगी 
बताय जाएगा तुम्हे किसी और के द्वारा 
क्या पहनो क्या न पहनो
क्या खाओ क्या न खाओ
कहाँ जाओ कहाँ न जाओ 
किससे बोलो किससे बतियाओ 
हंसी मजाक तुम्हारा काम ही नहीं 
तुम तो बस हुकुम बजाते रहो 
मन तो है ही नहीं तुम्हारा आत्मा भी नहीं है 
न मानो तो सज़ा के लिए शरीर है तुम्हारा 
कदम कदम पर वही करो जो तुम्हे करने को कहा जाए 
मन का हो न हो 
पल पल वैसे ही जियो जैसे कि तुम्हे जीने दिया जाए 
मन का हो न हो 
ऐ लड़कियों 
तुम कुछ भी करने के लिए नहीं हो आजाद 
क्योंकि वे चाहते हैं ऐसा 
वही वे जिन्हें करती हो तुम पैदा और पालना  
और वो भी तुम्हारी मर्जी से नहीं 
किसे और कब पैदा करो या न करो 
वे ही तय करेंगे 
एक दिन कहीं इन सब से होकर बहुत परेशान 
तुम सब एक साथ कहीं मौत पर अगर चला बैठीं अपनी मर्जी 
तो?

Thursday 3 July 2014

संस्कृति के रखवाले

इधर मत खड़े हो 
वो मत देखो
देखो वो मत खा लेना 
ना ना उसको तो पीना ही मत 
तुम्हे नहीं करने देंगे ऐसा 
हम हैं ठेकेदार धरम के 
और संस्कृति के रखवाले हैं हम 
कैसे गिरने दे सकते हैं तुमको 
नैतिकता का सारा भार है कन्धों पर हमारे 
और हम ही हैं जगत गुरु 
साक्षात ऋषि मुनियों की सन्तान 
न धमकाएं हम तो नरक बन जाए ये समाज 
हमारे बिना रसातल में समा जाए ये धरती 
अरे सुनो 
ओ आधुनिक कहलाने वालों भ्रस्टों 
ओ पश्चिमी असभ्यता ओढ़े दुराचारी लोगों सुनो 
ये चीखपुकार सुनकर एक आधुनिक भ्रष्ट राहगीर ने 
उस सुनसान रास्ते किनारे एक गड्ढे में झाँका 
जहां से ये आवाजें आ रहीं थीं 
एक मरियल जर्जर बूढा शरीर नीचे पड़ा रिरियाया 
बाबू जी कुछ पैसे दे दो 
कुछ खाया नहीं कई दिनों से