Monday 31 December 2012

भारत पुत्री

वह लड़ी होगी 
वह बड़ी हिम्मत से लड़ी होगी
जीने की अदम्य लालसा लिए 
मौत से इतने दिन लड़ते सबने देखा उसे 
अपने सम्मान को बचाने ले लिए 
उन दरिंदो से भी यक़ीनन खूब लड़ी होगी वह 
और जाते जाते एक चुनौती दे गई है हम सब को 
इंसानियत का हक़ अदा करने की चुनौती 
वह कह गई है 
हमसे कुछ सीखो तो लड़ाई मत छोड़ना 
जीने की लड़ाई 
सम्मान की लड़ाई 
आजादी से सांस लेने की लड़ाई 
पूरी ताकत भर विरोध में खड़े रहना दरिंदगी के 
हमने तो खूब संघर्ष किया काले चेहरों से 
अब तुम्हे मेरी कसम 
सिर्फ चेहरों तक उलझ के मत रह जाना 
उनके पीछे की पूरी कालिख को देख लेना ठीक से 
एक एक कोने से निकाल खींचना अँधेरी साजिशों को 
और मत बैठना चैन से 
सूरज के निकलने तक 

Tuesday 18 December 2012

सुदर्शन चक्र

फिर दुस्शासन अपनी पर है 
उसको यक़ीनन दुर्योधन का सहयोग है 
सुरक्षा के जिम्मेदार धूर्त चालबाज शकुनि ने 
शिखंडियों को लगाया है पहरों पर 
कर्तव्य से बढ़कर मर्यादा का बोझ लादे 
दुबके बैठे हैं चुपचाप विदुर द्रोण और भीष्म 
कुछ देखना ही नहीं चाहती 
पुत्र मोह से ग्रसित साम्राज्ञी गांधारी
ऐसा ही होता है एक अंधे राजा के शासन में 
एक बार जो अत्याचार हो गया स्त्री पर 
वस्त्र दान कोई उपाय नहीं है नारी की व्यथा का 
उस पर हुये अत्याचार सिर्फ और सिर्फ गर्दनें उतारने से कम होंगे 
अफसोस यह 
कि भगवान कृष्ण भी आ जाएँ 
तो वे भी सुदर्शन नहीं चलाते अपना 
द्रौपदियों के नामों की लिस्ट बढ़ती जाती है रोज रोज